विधानसभा सत्र की इन तस्वीरों ने बताया इंसानियत जिंदा है, पुलिस ने किया जोर-आजमाइश में घायल प्रदर्शनकारियों का इलाज
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लोहे के गेटों, कंटीले तारों से बनी बैरिकेडिंग को पार करने की जद्दोजहद में कई आंदोलनकारी गिर गए, स्थिति नियंत्रित करने में पुलिसकर्मी भी घायल
गैरसैंण: उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान विपक्षी दल कांग्रेस, स्थानीय पार्टी यूकेडी, सुराज दल और विभिन्न संगठनों ने धरना प्रदर्शन भी किया. पुलिस ने विधानसभा परिसर की सुरक्षा के लिए बैकिकेडिंग के जरिए कड़ी घेराबंदी की थी.
विधानसभा के हर ओर गूंजे प्रदर्शनकारियों के नारे: लेकिन प्रदर्शनकारियों के हौसले इतने बुलंद थे कि वो कई बैरिकेडिंग तोड़ते हुए विधानसभा के आखिरी गेट तक पहुंच गए. इस दौरान बैरिकेडिंग फांदने, तोड़ने और पुलिस के साथ जोर आजमाइश में कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए. प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश में अनेक पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गए. इस दौरान मानवता की जो मिसाल देखे को मिली सबने उसकी तारीफ की है.
मंगलवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने यह साबित कर दिया कि विचारों का मतभेद और आंदोलन अपनी जगह है, लेकिन इंसानियत का रिश्ता हर चीज से ऊपर है. विधानसभा घेराव के दौरान जहां एक तरफ भारी हंगामा, तीखी झड़पें और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच जबरदस्त खींचतान देखने को मिली. वहीं दूसरी तरफ बैरिकेडिंग के दोनों ओर मानवीय संवेदनशीलता की एक अनूठी मिसाल भी दर्ज की गई.
विधानसभा सत्र के विरोध-प्रदर्शन में दिखा अनोखा नजारा: अपनी विभिन्न मांगों को लेकर गैरसैंण विधानसभा कूचकर रहे प्रदर्शनकारियों और व्यवस्था संभाल रही पुलिस के बीच दिवालीखाल और जंगलचट्टी बैरियरों पर भारी धक्का-मुक्की हुई. लोहे के भारी गेटों और कटीले तारों से बनी मजबूत बैरिकेडिंग को पार करने की जद्दोजहद में कई आंदोलनकारी अनियंत्रित होकर गिर गए. इस कड़े टकराव के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के हाथ-पैरों और शरीर पर गंभीर चोटें आ गईं, जिससे वे दर्द से कराह उठे.
खाकी ने पेश की मानवीय संवेदनशीलता की मिसाल: तनाव के ऐसे माहौल में जहां अमूमन लाठियां और टकराव ही सुर्खियां बनते हैं, वहां उत्तराखंड पुलिस के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए दिल छू लेने वाला कदम उठाया. पुलिसकर्मियों ने तत्काल मोर्चे से हटकर घायलों की मदद की.
जवानों और अधिकारियों ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए घायल प्रदर्शनकारियों को सहारा दिया. उन्हें पानी पिलाया और मौके पर ही प्राथमिक उपचार किट मंगाकर उनके घावों पर दवा लगाई व पट्टियां बांधी. पुलिस के इस संवेदनशील रूप को देखकर मौके पर मौजूद हर शख्स ने खाकी की प्रशंसा की.
वर्दी के पीछे भी धड़कता है एक दिल: इस पूरे घटनाक्रम ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में विरोध करना जनता का अधिकार है और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना पुलिस का कर्तव्य. लेकिन इस कर्तव्य को निभाने के दौरान जब चोटें आती हैं, तो दर्द दोनों पक्षों को बराबर होता है.
शांति व्यवस्था संभालने के दौरान पुलिस के भी कई अधिकारियों और जवानों को चोटें आयीं. यह घटना याद दिलाती है कि एक कड़क वर्दी के पीछे भी एक आम इंसान होता है. उसका अपना एक परिवार होता है और एक संवेदनशील दिल होता है जो दूसरों के दर्द को महसूस करता है.
जिम्मेदारियों की टक्कर में इंसानियत की जीत: गैरसैंण की बर्फीली हवाओं के बीच मंगलवार की यह तस्वीर यह बताने के लिए काफी थी कि जब समाज में जिम्मेदारियों की टक्कर होती है, तब इंसानियत और अपनों के प्रति संवेदना ही सबसे बड़ा मरहम बनती है. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के फर्ज और हक का सम्मान करते हुए इस मर्मस्पर्शी पल को साझा किया.
मंगलवार 27 अक्टूबर से उत्तराखंड विधानसभा का साल का तीसरा और साल में गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में दूसरा सत्र शुरू हुआ. उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹7,844.18 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया है.

