September 5, 2026

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84 की उम्र में भी कायम है जज्बा, शिव प्रसाद चमोली को मिलेगा टेंज़िंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार

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छह दशक से पर्वतारोहण, स्कीइंग और रिवर राफ्टिंग में योगदान; 21 हजार से अधिक युवाओं को दे चुके हैं प्रशिक्षण

मसूरी। उम्र 84 वर्ष, लेकिन साहस और जुनून आज भी बरकरार है। हिमालय की चोटियों पर तिरंगा फहराने से लेकर दुर्गम नदियों में राफ्टिंग और हजारों युवाओं को साहसिक गतिविधियों का प्रशिक्षण देने वाले मसूरी निवासी शिव प्रसाद चमोली को टेंज़िंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार की लाइफटाइम अचीवमेंट श्रेणी के लिए चुना गया है। उनके चयन से उत्तराखंड और मसूरी के साहसिक खेलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।

हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट, केम्पटी फॉल के संस्थापक-निदेशक चमोली भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के पूर्व उप महानिरीक्षक रहे हैं। छह दशक से अधिक के साहसिक जीवन में उन्होंने पर्वतारोहण, स्कीइंग, रिवर राफ्टिंग और पर्वतीय प्रशिक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया।

1974 में नीलकंठ के प्रथम सफल आरोहण का नेतृत्व

चमोली ने वर्ष 1974 में 21,640 फीट ऊंचे नीलकंठ शिखर के प्रथम सफल आरोहण अभियान का नेतृत्व किया। वर्ष 1981 में संयुक्त भारत-न्यूजीलैंड हिमालयन ट्रैवर्स अभियान में कंचनजंगा से काराकोरम तक पांच हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की। 265 दिन चले इस अभियान में 106 दर्रे पार किए गए। वर्ष 1986 में उन्होंने 24,695 फीट ऊंची सासेर कांगड़ी-III चोटी के प्रथम आरोहण अभियान का भी नेतृत्व किया।

रिवर राफ्टिंग के क्षेत्र में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। वर्ष 1991 में भारत-जापान संयुक्त ब्रह्मपुत्र राफ्टिंग अभियान का नेतृत्व करते हुए त्सांगपो गॉर्ज से धुबरी तक करीब 1100 किलोमीटर की पहली सफल राफ्टिंग का नेतृत्व किया। वर्ष 1978 में केदार डोम पर भारत के पहले स्कीइंग अभियान में उपनेता रहे। 1989 में इटली में आयोजित विश्व पुलिस शीतकालीन खेलों और यूरोपीय स्की चैंपियनशिप में भारतीय दल की कप्तानी की।

21 हजार से अधिक युवाओं को बनाया प्रशिक्षित

आईटीबीपी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के बाद वर्ष 1994 में चमोली ने केम्पटी फॉल में हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट की स्थापना की। संस्थान के माध्यम से अब तक 21 हजार से अधिक युवाओं, छात्रों और नागरिकों को पर्वतारोहण, रॉक क्लाइम्बिंग, स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग, उच्च हिमालयी ट्रेकिंग और आउटडोर नेतृत्व का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

इसके अलावा उत्तराखंड पुलिस, एनडीआरएफ, होमगार्ड, अग्निशमन सेवा और जिला प्रशासन के 1,420 से अधिक खोज एवं बचाव कर्मियों को पर्वतीय बचाव और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है।

84 की उम्र में भी प्रशिक्षण में सक्रिय

चमोली भारतीय पर्वतारोहण फाउंडेशन की राष्ट्रीय स्पोर्ट्स क्लाइम्बिंग समिति के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे हैं। वह रॉयल जियोग्राफिकल सोसाइटी के फेलो हैं और पर्वतारोहण एवं राफ्टिंग अभियानों पर पुस्तकें भी लिख चुके हैं।

84 वर्ष की उम्र में भी वह हिमालयन एडवेंचर इंस्टीट्यूट के संचालन के साथ प्रशिक्षण गतिविधियों में सक्रिय हैं। चमोली के अनुसार यह सम्मान उनके व्यक्तिगत योगदान से कहीं अधिक उत्तराखंड के पर्वतों, नदियों और साहसिक परंपरा का सम्मान है। हिमालय से मिले साहस, अनुशासन और सेवा के संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही उनके जीवन का उद्देश्य रहा है।

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