September 11, 2026

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मसूरी की भार क्षमता खत्म, अंधाधुंध निर्माण और कटान पर नहीं लगी रोक तो पर्यटन को भविष्य में हो सकता है नुकसान –जुगरान

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मसूरी। पहाड़ों की रानी मसूरी की बढ़ती आबादी और अनियोजित विकास का बोझ उठाने की स्थिति में नहीं है। पहाड़ों और जंगलों के कटान से लेकर खनन और तेजी से बढ़ते कंक्रीट के निर्माण ने शहर की भार क्षमता पर गंभीर असर डाला है। आने वाले समय में यदि निर्माण गतिविधियों और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया गया तो इसका सीधा असर मसूरी के पर्यावरण और पर्यटन पर पड़ेगा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्त रविन्द्र जुगरान ने मसूरी में पत्रकार वार्ता में ये बात कही है ।

लाइब्रेरी क्षेत्र में के एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता रविन्द्र जुगरान ने मसूरी के एमपीजी काँलेज के प्रांतीयकरण पर सवाल उठाया है और कहा कि अब तक विद्यार्थियों को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय की डिग्री मिलती रही है। लेकिन प्रांतीयकरण के बाद कॉलेज को श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय से जोड़ने की बात है। उन्होने नगर पालिका को प्रस्ताव पर पुनर्विचार करना चाहिए। कॉलेज की हॉस्टल भूमि में पेड़ों के कटान का मामला उठाते हुए उन्होंने जिम्मेदारी तय करने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि कॉलेज की भूमि और संपत्तियों की निगरानी नहीं की गई तो भविष्य में इन्हें खुर्दबुर्द किए जाने का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने करीब तीन महीने तक मसूरी के विभिन्न हिस्सों का भ्रमण के दौरान पाया कि मसूरी शहर और आसपास के क्षेत्रों में जिस तेजी से पहाड़ों और पेड़ों का कटान हो रहा है, वह चिंता का विषय है। उन्होंने एमडीडीए, वन विभाग, खनन, राजस्व और पर्यावरण से जुड़े विभागों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मसूरी की पहचान केवल एक पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि प्राकृतिक विरासत के रूप में रही है। ब्रिटिश काल से ही इसका विशेष महत्व रहा है। उन्होंने मसूरी के बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करने के लिए आसपास के क्षेत्रों में योजनाबद्ध विकास की जरूरत बताई। उनका कहना था कि पर्यावरण अनुकूल और हल्के निर्माण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। मसूरी को कंक्रीट के जंगल में बदलने के बजाय उसकी प्राकृतिक संरचना को बचाने की दिशा में काम करना होगा। आज शहर में चारों ओर निर्माण का दबाव बढ़ रहा है। मसूरी से करीब 15 किलोमीटर के दायरे में भी पेड़ों और पहाड़ों के कटान, खनन, चारागाह की भूमि खुर्दबुर्द किए जाने और अवैध निर्माण की शिकायतें सामने आ रही हैं। जुगरान ने बताया कि उन्होंने इन मामलों को लेकर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव से शिकायत की थी। साथ ही वन संरक्षक गढ़वाल को भी शिकायत की उन्होने इसके जांच के निर्देश दिए है। उन्होंने जॉर्ज एवरेस्ट से संबंधित मामले को लेकर भी शिकायत किए जाने की बात कही। वहीं पुरुकुल-मसूरी रोपवे के टावर की नींव को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि टावरों की नींव सुरक्षित नही है। उन्होंने आरोप लगाया कि छोटे मकानों के नक्शे पास कराने में लोगों में आम लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है लेकिन बड़े निर्माण तेजी से हो रहे है । कहा कि इस मामले को भी संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया जाएगा। कहा कि आगामी चुनाव में सभी दलों के दावेदारों को पेड़ों के कटान, खनन, प्रदूषण और अवैध निर्माण पर अपना स्पष्ट रुख जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि मसूरी को बचाने के लिए अब चेतने का समय है। इस अवसर पर डॉ. दीपक जोशी, रविन्द्र गुसाईं, सुनील रतूड़ी, गंभीर पंवार, नीरज अग्रवाल, नरेंद्र बिष्ट, शूरवीर भंडारी सहित अन्य लोग मौजुद रहे।