चारधाम हेली सेवा में दो पायलट अनिवार्य करने के नियम पर उठाए सवाल, मौसम निगरानी तंत्र मजबूत करने की मांग
मसूरी। चारधाम हेली सेवा में हेलीकॉप्टर संचालन के लिए दो पायलट अनिवार्य किए जाने के नियम को राजस एयरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ मनीष सैनी ने अव्यावहारिक बताया है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर पायलटों की संख्या बढ़ाने के बजाय हिमालयी क्षेत्र में विश्वस्तरीय मौसम निगरानी तंत्र और आपातकालीन सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है।मनीष सैनी ने कहा कि चारधाम में संचालित हेलीकॉप्टर निर्माता कंपनियों, अमेरिकी संघीय विमानन प्रशासन (एफएए), यूरोपीय विमानन सुरक्षा एजेंसी (ईएएसए) और डीजीसीए से एक पायलट के संचालन के लिए प्रमाणित हैं। दुनिया के कई विकसित विमानन देशों में भी इन हेलीकॉप्टरों का संचालन एक ही पायलट करता है। ऐसे में दो पायलट अनिवार्य करने का फैसला व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि विमानन सुरक्षा का संबंध कॉकपिट में पायलटों की संख्या बढ़ाने से नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों को दूर करने से है।
उन्होंने कहा कि दो पायलट की व्यवस्था लागू होने से हेलीकॉप्टर संचालन की लागत बढ़ने के साथ यात्री क्षमता भी प्रभावित होगी। वर्तमान में हेलीकॉप्टर 6+1 कॉन्फिगरेशन में संचालित होते हैं, जिसमें एक पायलट और छह यात्री होते हैं। दो क्रू मेंबर होने पर यात्रियों की संख्या घटकर चार रह जाएगी। इससे प्रत्येक उड़ान में एक तिहाई यात्री क्षमता कम हो जाएगी। अतिरिक्त क्रू का खर्च भी बढ़ेगा, जिसका सीधा असर चारधाम यात्रा के किराये पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पहले से महंगी चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने के बजाय किराये को कम करने के प्रयास होने चाहिए।
सैनी ने कहा कि हिमालयी क्षेत्र में हेलीकॉप्टर संचालन की सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी मौसम की सटीक और तत्काल जानकारी उपलब्ध कराना है। इसके लिए पूरे हिमालयी क्षेत्र में लाइव मौसम केंद्रों और वेदर टावरों का नेटवर्क विकसित किया जाना चाहिए, ताकि पायलटों को उड़ान से पहले और उड़ान के दौरान वास्तविक समय के मौसम की जानकारी मिल सके।
उन्होंने स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, अमेरिका के अलास्का, न्यूजीलैंड और नेपाल में अपनाई जा रही पर्वतीय हेलीकॉप्टर संचालन व्यवस्थाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि चारधाम क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्थाएं लागू की जा सकती हैं। इसके तहत प्रत्येक हेलीपैड पर स्वचालित मौसम केंद्र, दर्रों और घाटियों में लाइव वेदर कैमरे तथा घाटियों में उन्नत मौसम रडार स्थापित किए जाने चाहिए। साथ ही पूरे हेली सेक्टर के लिए एक समान मौसम मानक निर्धारित किए जाने की जरूरत है।
उन्होंने हेली मार्गों पर आपातकालीन लैंडिंग के लिए अतिरिक्त हेलीपैड विकसित करने और चारधाम के मौजूदा हेलीपैडों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने की मांग की। कहा कि खराब मौसम में पायलटों को सुरक्षित स्थान पर उतरने का विकल्प मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौसम निगरानी, आपातकालीन लैंडिंग सुविधाओं और हेलीपैडों के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर चारधाम हेली सेवा को दुनिया की सबसे सुरक्षित पर्वतीय हेली सेवाओं में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए हेली सेवा संचालक सरकार और डीजीसीए के साथ सहयोग करने को तैयार हैं।

