उत्तराखंड की मतदाता सूची से 11.07 लाख नाम घटे, 13.40 प्रतिशत की गिरावट
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अनूप नौटियाल और प्रवीण उप्रेती ने रिपोर्ट जारी कर निर्वाचन आयोग से मांगा विस्तृत ब्योरा, 36 विधानसभा क्षेत्रों में महिला मतदाताओं की अधिक गिरावट का दावा। देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव और तीन अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के बीच 11,07,695 मतदाताओं की कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट 13.40 प्रतिशत है। सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल और प्रवीण उप्रेती ने शनिवार को देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में ‘एसआईआर और 2022 से 2027 के विधानसभा चुनावों के बीच उत्तराखंड का बदलता मतदाता परिदृश्य’ शीर्षक वाली रिपोर्ट जारी कर यह दावा किया। उन्होंने मतदाता सूची में आई कमी के कारणों को सार्वजनिक करने और निर्वाचन आयोग से विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में प्रदेश में 82,66,644 मतदाता थे, जबकि तीन अक्टूबर 2026 की अंतिम मतदाता सूची में इनकी संख्या घटकर करीब 71.59 लाख रह गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2012 से 2022 के बीच राज्य में लगभग 18.89 लाख मतदाता बढ़े थे। ऐसे में हाल के वर्षों में मतदाताओं की संख्या में आई कमी के कारणों की विस्तृत जांच जरूरी है।
देहरादून में 20.22 प्रतिशत की गिरावट
रिपोर्ट के मुताबिक, मतदाताओं की संख्या में कमी का असर सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में एक समान नहीं रहा। देहरादून जिले में करीब 3.03 लाख मतदाता कम हुए हैं, जो 20.22 प्रतिशत की गिरावट है। पौड़ी गढ़वाल में 14.89 प्रतिशत, पिथौरागढ़ में 13.61 प्रतिशत और टिहरी गढ़वाल में 13.14 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
विधानसभा क्षेत्रों में देहरादून कैंट में 34.19 प्रतिशत, राजपुर रोड में 32.64 प्रतिशत और धर्मपुर में 27.59 प्रतिशत की गिरावट का दावा किया गया है। नौटियाल और उप्रेती ने इन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में आई कमी का विस्तृत विवरण सार्वजनिक करने की मांग की।
राजपुर रोड में बदरीनाथ और केदारनाथ से भी कम मतदाता
रिपोर्ट में राजपुर रोड विधानसभा क्षेत्र के आंकड़ों को खास तौर पर रेखांकित किया गया है। वर्ष 2022 में राजपुर रोड में 1,19,615 मतदाता थे, जो अक्टूबर 2026 की सूची में घटकर 80,569 रह गए। इसके विपरीत बदरीनाथ में 91,555 और केदारनाथ में 85,924 मतदाता दर्ज किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 के मुकाबले राजपुर रोड में 39,046 मतदाता कम हुए, जबकि बदरीनाथ में 13,240 और केदारनाथ में 7,092 की कमी आई। इस आधार पर अब राजपुर रोड में इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों से कम मतदाता रह गए हैं।
36 सीटों पर महिला मतदाताओं में अधिक गिरावट
रिपोर्ट में महिला मतदाताओं की संख्या में आई कमी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अनुसार, प्रदेश की 70 विधानसभा सीटों में से 36 सीटों पर महिला मतदाताओं की संख्या में प्रतिशत के लिहाज से गिरावट पुरुष मतदाताओं की तुलना में अधिक रही। ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, टिहरी गढ़वाल, उत्तरकाशी और अल्मोड़ा जिलों में भी यह प्रवृत्ति सामने आने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 में द्वाराहाट एकमात्र ऐसा विधानसभा क्षेत्र था, जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक थी। अध्ययन में शामिल वर्ष 2026 की मतदाता सूची में किसी भी विधानसभा क्षेत्र में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक नहीं बताई गई है।
नौटियाल और उप्रेती ने इन आंकड़ों की गहन समीक्षा की जरूरत बताते हुए निर्वाचन आयोग से विधानसभा क्षेत्र और मतदान केंद्र के स्तर पर पुरुष एवं महिला मतदाताओं के अलग-अलग आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने नाम हटाने के कारणों का भी लिंगवार विवरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई।
अन्य राज्यों से भी की गई तुलना
रिपोर्ट में विभिन्न राज्यों में मतदाताओं की संख्या में हुए बदलाव की तुलना भी की गई है। इसमें उत्तराखंड में 13.40 प्रतिशत की गिरावट का दावा किया गया है। रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में करीब 11.4 प्रतिशत, गोवा में 9.18 प्रतिशत, तमिलनाडु में 8.79 प्रतिशत, पश्चिम बंगाल में 6.88 प्रतिशत, मणिपुर में 5.28 प्रतिशत, केरल में 1.12 प्रतिशत और पंजाब में 0.7 प्रतिशत की कमी का उल्लेख है। बिहार और असम में संबंधित तुलनाओं के दौरान मतदाताओं की संख्या में वृद्धि बताई गई है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी स्वीकार किया गया है कि विभिन्न राज्यों में आंकड़ों की संदर्भ तिथियां और मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रियाएं अलग-अलग हैं। इसलिए इन आंकड़ों की तुलना समान मानकों के आधार पर किए जाने की जरूरत है।
निर्वाचन आयोग से पारदर्शिता की मांग
प्रेस वार्ता में अनूप नौटियाल ने कहा कि मतदाता सूची में इतनी बड़ी कमी पारदर्शिता, जवाबदेही और चुनावी प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़े सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए। आयोग को सक्रियता से काम करते हुए मतदाताओं को उनके नाम की स्थिति जांचने की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।
रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग से 11.07 लाख मतदाताओं की कमी का विधानसभा क्षेत्रवार और मतदान केंद्रवार विवरण जारी करने की मांग की गई है। इसमें मृत्यु, पलायन, दोहरी प्रविष्टियों और अन्य कारणों से हटाए गए नामों का अलग-अलग ब्योरा देने के साथ पुराने आंकड़ों से मिलान करने को कहा गया है।
इसके अलावा देहरादून कैंट, राजपुर रोड और धर्मपुर में मतदाताओं की संख्या में आई कमी की विस्तृत समीक्षा, सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में लिंग आधारित विश्लेषण और राजपुर रोड, बदरीनाथ तथा केदारनाथ में एसडीडी एवं नो मैपिंग से संबंधित आंकड़ों का स्पष्टीकरण मांगा गया है।
नौटियाल और उप्रेती ने कहा कि चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान पात्र मतदाताओं को नाम दर्ज कराने, विवरण में सुधार करने और शिकायतों की स्थिति जानने के लिए सरल एवं सुलभ व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उनके अनुसार, मतदाता सूची के आंकड़ों में पारदर्शिता से चुनावी प्रक्रिया में जनता का विश्वास मजबूत किया जा सकता है।
