अतिथि शिक्षकों ने की सरकार से भविष्य को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग की।

अतिथि शिक्षकों ने की सरकार से भविष्य को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग की।

देहरादून : विभागीय ट्रांसफर के कारण प्रभावित अतिथि शिक्षकों को 30 जुलाई 2022 उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से पुनः काउंसलिंग कर विद्यालयों का आवंटन किया गया था । परंतु अतिथि शिक्षकों द्वारा विद्यालय ज्वाइन करने के महज पांच- छः दिनों बाद ही आयोग द्वारा नव चयनित प्रवक्ताओं को उनके आवंटित विद्यालय भेजने से अतिथि शिक्षक को पुनः प्रभावित होना पड़ा है।जिससे अतिथि शिक्षकों का मनोबल गिरता नजर आ रहा है,अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वह अतिथि शिक्षक के तौर पर वर्ष 2015 से कार्य करते आ रहे हैं। परंतु सरकार ने उनके लिए अभी तक कोई ठोस नीति नहीं बना पाए,पूरे प्रदेश में एक जगह से दूसरे जगह ऐसे भेज दिया जाता है कि मानो इनका कोई वजूद ही न हो।अतिथि शिक्षकों का कहना है कि सरकार ही यह बताएं कि जिन अतिथि शिक्षकों को विद्यालयों से एक-एक हफ्ते में प्रभावित किया जाता हो। वह किस प्रकार पूर्ण मनोयोग से शिक्षण कार्य करेगा।सैकड़ों अतिथि शिक्षकों के पद ट्रांसफर,नव नियुक्ति के कारण भर दिए गए है। जिससे हताश,निराश होकर अपना बोरिया बिस्तरा इधर से उधर ढोने में लगे हैं, ऐसी स्थिति में जब तक पढ़ाने का मन बनाते हैं उसी समय यही डर बना रहता है कि कहीं यहाँ कोई और साथी शिक्षा विभाग द्वारा न आ जाएं,प्रदेश मीडिया प्रभारी जितेन्द्र गौड़ ने कहा कि शाशन द्वारा अभी विभागीय प्रमोशन भी होने हैं। जिससे उनके पदों पर पुनः खतरा बना हुआ है,अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी दो तीन जिलों में जिला शिक्षाधिकारी अपनी अलग ही नीति बनाए बैठें है, जिले में पद रिक्त होने के बाबजूद घर बैठे अतिथि शिक्षकों को नियुक्ति देने में आनाकानी कर रहे हैं, समझ नहीं आता है कि हो क्या रहा है सरकार पर दोष दे या अधिकारियों पर जबकि माननीय शिक्षा मंत्री ने साफ व स्पष्ट शब्दों में कहा था कि अतिथि शिक्षकों के स्थान पर किसी को नहीं भेजा जाएगा। प्रभावित अतिथि शिक्षकों में प्रदीप असवाल,जयदेव, प्रीति, राजकुमारी, गोविन्द,चमोली से शीलू सती गीता,सुनीता,व टिहरी से रीना चौहान आदि ने सरकार से अतिथि शिक्षकों के भविष्य को लेकर ठोस नीति बनाने की मांग की है।

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