October 19, 2026

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चयनित 27 डॉक्टरों ने नहीं ली ज्वाइनिंग, एक महीने बाद जाकर पोस्टिंग कर पाया विभाग

उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग में 27 चिकित्सकों ने चयनित होने के बाद भी जॉइनिंग नहीं ली है.

देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. इसी कड़ी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले महीने प्रदेश को बड़ी संख्या में नए चिकित्सकों की सौगात दी थी. उम्मीद थी कि चारधाम यात्रा के पीक सीजन के दौरान इन चिकित्सकों की सेवाएं तत्काल मरीजों को मिलने लगेगी और लंबे समय से डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे अस्पतालों को राहत मिलेगी. लेकिन हकीकत कुछ अलग ही सामने आई है. चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग उन्हें समय पर तैनाती नहीं दे पाया और अब करीब एक महीने बाद जाकर उनकी पोस्टिंग की प्रक्रिया पूरी हो सकी है.

दरअसल 14 मई को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सरकारी आवास पर आयोजित कार्यक्रम में चयनित चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र वितरित किए थे. उस समय कुल 216 चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र सौंपे गए थे. सरकार और स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद थी कि इन चिकित्सकों की तैनाती जल्द से जल्द विभिन्न अस्पतालों में कर दी जाएगी, जिससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी. खास तौर पर चारधाम यात्रा के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में इन डॉक्टरों की अहम भूमिका रहने की उम्मीद जताई गई थी.

हालांकि नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी चिकित्सकों को अस्पतालों में तैनाती मिलने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. स्वास्थ्य विभाग अब जाकर इन चिकित्सकों की पोस्टिंग से जुड़ी सूची जारी कर पाया है. यानी नियुक्ति पत्र वितरण और वास्तविक तैनाती के बीच लगभग एक महीने का अंतराल रहा. ऐसे में जिन चिकित्सकों से तत्काल सेवाएं मिलने की उम्मीद थी, वे इस दौरान अपने कार्यस्थलों पर योगदान नहीं दे सके.स्वास्थ्य विभाग के लिए यह स्थिति इसलिए भी सवाल खड़े करती है, क्योंकि विभाग लंबे समय से राज्य के विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की कमी की बात करता रहा है.

कई पर्वतीय जिलों के अस्पतालों में विशेषज्ञ और सामान्य चिकित्सकों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं. इसके बावजूद चयनित चिकित्सकों को तैनाती देने में विभाग को एक महीने का समय लग गया. इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि अस्पतालों में डॉक्टरों की इतनी आवश्यकता थी तो पोस्टिंग प्रक्रिया पहले से तैयार क्यों नहीं की गई.अब जब पोस्टिंग आदेश जारी हो चुके हैं तो इन चिकित्सकों का लाभ राज्य को चारधाम यात्रा के दूसरे चरण यानी मानसून सीजन के दौरान मिल सकेगा. मानसून के समय पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्घटनाओं, जलजनित बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका बढ़ जाती है.

ऐसे में नए चिकित्सकों की तैनाती स्वास्थ्य विभाग के लिए राहत का विषय मानी जा रही है. उम्मीद की जा रही है कि इससे जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सा सेवाएं बेहतर होंगी. इस पूरे मामले में एक और दिलचस्प तथ्य सामने आया है. चिकित्सा चयन बोर्ड द्वारा प्रदेश में रिक्त पदों के सापेक्ष कुल 243 चिकित्सकों का चयन किया गया था. लेकिन इनमें से केवल 216 चिकित्सकों ने ही नियुक्ति पत्र लेने में रुचि दिखाई. जबकि 27 चयनित चिकित्सकों ने सरकारी सेवा ज्वाइन करने की दिशा में कोई पहल नहीं की.

यानी चयनित होने के बावजूद 27 चिकित्सकों ने सरकारी नौकरी स्वीकार नहीं की. निजी क्षेत्र में बेहतर वेतन, बड़े शहरों में कार्य करने की सुविधा और करियर के अधिक अवसरों के कारण कई चिकित्सक सरकारी सेवा से दूरी बनाते हैं. खासकर पर्वतीय राज्यों में दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती की संभावना भी कई अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा ज्वाइन करने से रोकती है. हालांकि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि चयनित होने के बावजूद 27 चिकित्सकों ने नियुक्ति क्यों नहीं ली. उधर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने इसपर होम वर्क पूरा होने और लिस्ट जारी किए जाने की बात कही, साथ ही इससे अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी भी दूर होने की बात कही.

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