September 27, 2026

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सूरीनाम की राजदूत ने जन्माष्टमी पर मनसा देवी और काली मंदिर में की पूजा, कहा- शांति और संतुष्टि का अनुभव हुआ

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दक्षिण काली मंदिर में पूजा अर्चना के बाद राजदूत हनीशा जयराम ने कहा हरिद्वार आकर बहुत अच्छा लगा, केदारनाथ दर्शन की इच्छा जताई

हरिद्वार: दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के उत्तरी तट पर स्थित देश सूरीनाम की राजदूत हनीशा जयराम श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार पहुंचीं. अपने धार्मिक हरिद्वार दौरे पर उन्होंने मां मनसा देवी मंदिर में दर्शन पूजन किया. इसके बाद सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर पहुंचकर भी पूजा अर्चना की. वहां उन्होंने निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज से आशीर्वाद लिया. इस दौरान उन्होंने गंगा और संत परंपरा के प्रति भी अपनी श्रद्धा व्यक्त की.

सूरीनाम की राजदूत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर हरिद्वार पहुंचीं: दक्षिण काली मंदिर में पूजा अर्चना के बाद राजदूत हनीशा जयराम ने कहा कि हरिद्वार आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा. मंदिर में पहुंचने के बाद उन्हें भीतर से अलग तरह की शांति और संतुष्टि का अनुभव हुआ.

सूरीनाम की राजदूत हनीशा जयराम ने अपने भाव इस तरह प्रकट किए: उन्होंने कहा कि-

यहां आने के बाद मेरे पास अपनी अनुभूति को व्यक्त करने के लिए शब्द कम पड़ गए हैं. जो भी हो रहा है, अच्छा हो रहा है. इस अनुभव को पाकर मैं स्वयं को धन्य और सम्मानित महसूस कर रही हूं.
-हनीशा जयराम, राजदूत, सूरीनाम-

आचार्य महामंडलेश्वर ने ये कहा: वहीं आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि सूरीनाम की राजदूत बेहद सरल, सहज और धार्मिक स्वभाव की हैं. भारत और सनातन परंपरा के प्रति उनके मन में गहरी श्रद्धा और प्रेम है. उन्होंने बताया कि-

सूरीनाम की राजदूत ने मां मनसा देवी और दक्षिण काली मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना की. इस दौरान उन्होंने गंगा और संतों के प्रति भी अपनी आस्था प्रकट की. हनीशा जयराम भारत और सूरीनाम के संबंधों को और मजबूत करने की इच्छुक हैं. वह आगे भी हरिद्वार आती रहेंगी.
-स्वामी कैलाशानंद गिरि, आचार्य महामंडलेश्वर-

हनीशा जयराम ने केदारनाथ दर्शन की इच्छा जताई: आचार्य महामंडलेश्वर ने बताया कि सूरीनाम की राजदूत ने केदारनाथ धाम के दर्शन की इच्छा भी जताई है. हालांकि मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए फिलहाल उन्हें वहां की यात्रा न करने की सलाह दी गई है. उन्होंने बताया कि सूरीनाम में बीस प्रतिशत हिंदू रहते हैं. वहां हिंदी के साथ-साथ संस्कृत को भी लोग जानते हैं. वहां के राष्ट्रपति ने भी संस्कृत भाषा में ही शपथ ली थी. सूरीनाम में उनकी तीसरी पीढ़ी निवास कर रही है.

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