September 28, 2026

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किच्छा में हाई-वोल्टेज ड्रामा: खान फार्म पर कब्जे को लेकर आमने-सामने सायरा वाड्रा और नसरीन सांगा, देर रात तक चला विधायक का धरना

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उत्तराखंड के किच्छा में खान फार्म पर कब्जे का हाईप्रोफाइल केस, कांग्रेस विधायक का धरना, सुबह एसडीएम ऑफिस में पेश करने होंगे दस्तावेज.

रुद्रपुर: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के किच्छा में पिपलिया मोड़ स्थित खान फार्म पर कब्जे के मामले ने तूल पकड़ लिया है. मामले में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायर वाड्रा ने नसरीन सांगा पर जबरन कब्जे का आरोप लगाया है. जबकि, नसरीन सांगा ने भी इन आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है. मामले ने राजनीतिक रंग भी लिया है. बवाल इतना बढ़ा कि किच्छा से कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. विवाद को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है.

हालांकि, देर रात पर हंगामे और धरना प्रदर्शन को देखते हुए किच्छा एसडीएम ने सुबह 11:30 बजे दोनों पार्टियों का ऑफिस बुलाया है. दोनों के एडवोकेट अपने-अपने दस्तावेज एसडीएम किच्छा गौरव पांडे को दिखाएंगे. फिर आगे उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी. एसडीएम के इस आश्वासन के बाद कांग्रेस विधायक और उनके समर्थकों ने धरना समाप्त किया. फिलहाल भारी पुलिस बल मौके पर तैनात है.

पूरा मामला जानें: उधम सिंह नगर जनपद के किच्छा क्षेत्र स्थित पिपलिया मोड़ पर स्थित खान फार्म पर कब्जे को लेकर बुधवार (1 जुलाई) को बड़ा विवाद खड़ा हो गया. जमीन पर स्वामित्व और कब्जे के दावे को लेकर दो पक्ष आमने-सामने आ गए, जिससे मौके पर तनावपूर्ण माहौल बन गया. इसमें एक पक्ष कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायर वाड्रा हैं और दूसरा पक्ष की ओर से नसरीन सांगा हैं. दोनों ही इस फार्म पर अपना अधिकार बता रही हैं.

स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस और प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची एवं सुरक्षा व्यवस्था संभाली. फिलहाल, पूरे क्षेत्र में पुलिस तैनात है और प्रशासन मामले पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.

जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायर वाड्रा अपने समर्थकों के साथ खान फार्म पहुंचीं. उन्होंने आरोप लगाया कि,

“विवाद कुछ नहीं है, विवाद इन लोगों ने बना दिया है. यह फार्म हाउस मेरी बुआ का है. उन्होंने अपनी वसीयत में मुझे और उनके कजिन ब्रदर सिकंदर आलम खान को 2024 में वसीयत में डाला था. उन्होंने शादी नहीं की थी तो उनकी कोई संतान नहीं है. हम ही बचपन से उनके साथ रहे हैं और उनकी देखभाल हमने ही की है. तो उन्होंने यह विल हमारे नाम की थी. उनकी मृत्यु 18 दिसंबर 2025 को हुई थी. जैसे ही इसकी खबर दूसरे पक्ष (बुआ की बहन) को लगी वो अपने माफिया टाइप गुंडों के साथ अंदर घुस गईं. हमने कभी उनको यहां देखा नहीं.

18 दिसंबर को बुआ की मौत हुई थी और 19 तारीख को यह गुंडों के साथ अंदर घुस गई थीं. मैं दिल्ली वापस चली गई थी. उसके बाद और इन्होंने रात में अंदर घुसकर बहुत बदतमीजी की. हमारे पास ओरिजिनल रजिस्टर्ड वसीयत है. हमने कोर्ट से स्टे आर्डर भी लिया है लेकिन यह लोग कोर्ट के आर्डर का कोई मान नहीं रख रहे हैं.

हम चाहते हैं कि शांति से मामला सुलझे. दूसरा पक्ष कोर्ट जाए और कोर्ट हमें बता दे और कुछ दिखा पाएं तो कोर्ट में दिखाएं. हमें लड़ाई झगड़ा किसी से नहीं करना, शांति से मामला सुलझाना है.

मैं आज अपने स्टाफ से यहां मिलने आई थी क्योंकि यहां सैलरी मैं देती हूं सभी को और जब मैं वापस जा रही थी तो स्टाफ ने मुझे बताया कि यह लोग घुस गए हैं और हमें बाहर निकाल दिया है और सारे ताले तोड़ दिए हैं, सीसीटीवी कैमरे भी डैमेज कर दिए हैं. 18 जनवरी को भी ये अंदर घुसी थीं और सारे सीसीटीवी कैमरे डैमेज किए थे. अंदर घुसकर स्टाफ से बदतमीजी की गई थी. हमने पुलिस को तब भी FIR की थी, अभी दोबारा ये लोग घुसे हैं तो इसका मतलब साफ है कि उनके खिलाफ कुछ नहीं किया गया.

यह फार्म हमारी बुआ द्वारा की गई वसीयत के आधार पर मेरी वैध संपत्ति है. नसरीन सांगा ने फार्म पर कार्य कर रहे मजदूरों को हटाकर जबरन कब्जा कर लिया है. प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर कब्जा हटाए और हमें न्याय दिलाए.“
– सायर वाड्रा, प्रियंका वाड्रा की जेठानी –

विवाद की सूचना मिलते ही किच्छा कांग्रेस विधायक तिलकराज बेहड़ भी अपने समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे. विधायक समेत कई नेताओं ने खान फार्म के मुख्य द्वार पर धरना शुरू कर दिया. धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर निष्पक्ष कार्रवाई न करने का आरोप लगाया और कहा कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.

वहीं, फार्म के अंदर मौजूद नसरीन सांगा ने सायर वाड्रा, विधायक तिलकराज बेहड़ और कांग्रेस नेताओं की ओर से लगाए गए आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने अपने पक्ष में कानूनी कार्रवाई की बात कही.

“मेरे पास अपने दावे से संबंधित दस्तावेज हैं और पूरे मामले को एकतरफा तरीके से पेश किया जा रहा है.“- नसरीन सांगा, दूसरा पक्ष

फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने स्वामित्व के दावे कर रहे हैं, जिसकी जांच प्रशासन की ओर से की जा रही है. धरने के दौरान विधायक तिलकराज बेहड़ ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि पीड़ित पक्ष को न्याय नहीं मिला, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है.

“यह मिसेज खान का फार्म हुआ करता था. मिसेज खान ने अपनी डेथ से पहले उनकी सेवा सायरा वाड्रा कर रही थीं. बुआ का रिश्ता है. सायरा भतीजी हैं उनकी. पुरानी काफी बात हो गई है. उन्होंने अपनी मृत्यु से पहले एक रजिस्टर्ड वसीयत कर 7-8 एकड़ की जमीन इनके नाम की. अंदर 25 साल पुराने लॉकर भी हैं. मजदूर हैं उनके बच्चे सब हैं. जब वसीयत हो गई तब नसरीन सांगा अचानक सामने आ गईं. वह मिसेज खान की बहन लगती हैं. मिसेज खान ने अपनी बहन को वसीयत नहीं दी, जिन्होंने सेवा की उनका नाम वसीयत में डाला.

कोर्ट से भी सायरा वाड्रा ने स्टे आर्डर लागू करवा रखा है कि किस क्षेत्र में कोई अंदर नहीं घुसेगा, सिविल जज कोर्ट से भी स्टे है और आज अचानक इन सारी चीजों को दरकिनार करते हुए पुलिस प्रशासन की सहमति से दूसरा पक्ष कुछ क्रिमिनल लोगों को अंदर बैठ गई हैं. हमारा कहना है कि वह बाहर निकलें, सायरा वाड्रा को अंदर नहीं जाने दिया जा रहा. पूरी मिलीभगत है. मोटे पैसे का खेल हुआ है. 7-8 एकड़ की करोड़ों की जमीन है. बेईमान हो गए हैं लोग. प्रशासन भी उसके साथ जुड़ गया है. नीचे से ऊपर तक भ्रष्टाचार और लूट हो रही है.

हमने प्रशासन से कहा कि उनको भी बाहर कर दीजिए, जब कोर्ट से डिसीजन आ जाएगा तब अंदर चले जाएंगे. प्रशासन उसमें भी तैयार नहीं हो रहा. प्रशासन ने उनको पूरा संरक्षण दे रखा है. हम लड़ रहे हैं कि खाली करो तब हम जाएंगे.

यदि प्रशासन की कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ, तो हम घातक कदम उठाने को मजबूर होंगे. एक-दो दिन के भीतर मैं जिले के अधिकारियों के नाम लिखकर प्रदेश और केंद्र सरकार को स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजूंगा. ताकि, पूरे मामले की जानकारी उच्च स्तर तक पहुंच सके.“
– तिलक राज बेहड़, कांग्रेस विधायक –

विवाद बढ़ने के बाद पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे. जहां दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को शांत करने का प्रयास किया. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मामले में किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. भूमि से संबंधित सभी दस्तावेजों, वसीयत, राजस्व अभिलेखों और अन्य कानूनी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी. जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल, खान फार्म के आसपास भारी पुलिस बल तैनात है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है. इस मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर हलचल पैदा कर दी है. अब सभी की नजर प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है. करीब 5 घंटे से लगातार धरना जारी है. उधम सिंह पुलिस और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही है.

“कानून व्यवस्था खराब ना हो, उसे देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है. सुबह 11:30 बजे दोनों पार्टियों का ऑफिस बुलाया है. दोनों के एडवोकेट अपने-अपने दस्तावेज दिखाएंगे. उसके आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी.“
– गौरव पांडे, एसडीएम, किच्छा –

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