September 27, 2026

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भोजशाला मामला: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मुस्लिम पक्ष

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मुस्लिम पक्ष की तरफ से सर्वोच्च अदालत में लगाई गई है विशेष अनुमति याचिका (SLP). मामले पर शुक्रवार को हो सकती है सुनवाई.

धार/नई दिल्ली: धार भोजशाला मामले में मुस्लिम पक्ष की ओर से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. मुस्लिम पक्ष की ओर से काजी मोइनुद्दीन ने गुरुवार को देश की सर्वोच्च अदालत में विशेष अनुमति याचिका (SLP) लगाई है. बताया जा रहा है कि इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है.

इंतजामिया कमेटी कमाल मौला मस्जिद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी हाईकोर्ट में इस मामले में पक्षकार और पैरोकार थे. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने भोजशाला परिसर में स्थित कमाल मौला मस्जिद परिसर को देवी सरस्वती यानी वाग्देवी का मंदिर माना था. कोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को जुमे की साप्ताहिक नमाज पढ़ने की अनुमति रद्द कर दी थी.

हाईकोर्ट ने मुस्लिम समुदाय को नमाज पढ़ने की छूट देने वाले ASI के आदेश को कर दिया है रद्द

हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 2003 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की छूट दी गई थी. इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग से जमीन तलाशने का सुझाव दिया गया था. मुस्लिम पक्ष ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है कि यह फैसला पुरातात्विक साक्ष्यों और उपासना स्थल अधिनियम (Places of Worship Act, 1991) की मूल भावना के विपरीत है.

मुस्लिम पक्ष के सुप्रीम कोर्ट जाने की आशंका के बीच हिंदू पक्षकारों ने पहले ही सर्वोच्च न्यायालय में ‘कैविएट’ याचिका दायर कर दी है. इसमें अपील की गई है कि हिंदू पक्ष का पक्ष सुने बिना कोर्ट कोई भी एकतरफा आदेश पारित न करे. मुस्लिम पक्ष का कहना है कि हाई कोर्ट के आदेश से उनके अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, इसलिए सर्वोच्च न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की गई है. वहीं, हिंदू पक्ष इस मामले में हाई कोर्ट के फैसले को उचित बता रहा है.

मुस्लिम पक्ष का कहना है हाईकोर्ट का फैसला Places of Worship Act, 1991 की मूल भावना के विपरीत

मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने बताया कि उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद जल्द ही मामले को सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे और हाई कोर्ट के आदेश पर स्टे लगाने की मांग करेंगे. उनका कहना है कि हमारे पास मजबूत कानूनी और ऐतिहासिक साक्ष्य मौजूद हैं. धार स्थित कमाल मौला मस्जिद में पिछले लगभग 700 वर्षों से लगातार जुमे की नमाज अदा की जाती रही है. इस परंपरा के बाधित होने से समाज में गहरा दुख और निराशा है. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समाज संविधान और कानून के दायरे में रहकर ही अपनी लड़ाई लड़ेगा.

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