August 20, 2026

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“सुनवाई नहीं, समाधान चाहिए — शिकायतकर्ता की संतुष्टि सर्वोपरि: मुख्यमंत्री”

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उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अहम संदेश देते हुए कहा कि सरकार के लिए किसी भी समस्या का समाधान तब तक अधूरा माना जाएगा, जब तक शिकायतकर्ता पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो जाता। उन्होंने यह टिप्पणी जनसुनवाई और शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश देते हुए की।


मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रक्रियागत कार्यवाही पूरी करना नहीं है, बल्कि जनता को वास्तविक राहत पहुँचाना है। उन्होंने कहा:

“सुनवाई केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। समाधान ऐसा हो, जिससे व्यक्ति को यह महसूस हो कि उसकी बात सुनी गई और उस पर प्रभावी कार्रवाई हुई।”

मुख्यमंत्री श्री धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर शिकायत को पूरी गंभीरता से लें, और उसका समाधान समयबद्ध व संतोषजनक हो। उन्होंने यह भी कहा कि विभागीय स्तर पर लापरवाही या टालमटोल की प्रवृत्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री कार्यालय में संचालित सीएम हेल्पलाइन, जन संवाद पोर्टल, और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत प्राप्त शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीकी साधनों के साथ-साथ मानवीय संवेदना और संवाद भी अत्यंत आवश्यक हैं।

मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि:

  • हर जिले में समय-समय पर जनसंवाद शिविर आयोजित किए जाएं।

  • शिकायतकर्ता से समाधान के बाद फीडबैक लिया जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वह संतुष्ट है या नहीं।

  • गंभीर या बार-बार आने वाली शिकायतों पर विशेष सतर्कता और निगरानी रखी जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि एक उत्तरदायी प्रशासन ही अच्छे शासन की नींव होता है, और उत्तराखण्ड सरकार “जन सेवा को सर्वोपरि” मानते हुए कार्य कर रही है।

इस दौरान प्रमुख सचिव, सचिव स्तर के अधिकारी, जिलाधिकारीगण, और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े रहे।

मुख्यमंत्री का यह बयान प्रदेश में जनता और प्रशासन के बीच संवाद और विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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