August 14, 2026

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लोकगीतों से जागरूकता का संदेश दे रहे सब इंस्पेक्टर अनूप नयाल,

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लोकगीतों से जागरूकता का संदेश दे रहे सब इंस्पेक्टर अनूप नयाल,उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति सदियों से समाज को जोड़ने और जागरूक करने का माध्यम रही है। आज के आधुनिक समय में भी कुछ लोग अपनी परंपराओं को जीवित रखने और समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम कर रहे हैं। ऐसे ही एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व हैं उत्तराखंड पुलिस में तैनात सब इंस्पेक्टर अनूप नयाल, जो अपनी ड्यूटी के साथ-साथ लोकसंस्कृति के संरक्षण और सामाजिक जागरूकता का अनोखा अभियान चला रहे हैं।वर्तमान में उत्तरकाशी जनपद के कोतवाली धरासू में तैनात अनूप नयाल लोकगीतों के माध्यम से समाज को महत्वपूर्ण संदेश दे रहे हैं। वे पारंपरिक पहाड़ी गीतों और संगीत के जरिए लोगों को ट्रैफिक नियमों के पालन, नशे से दूर रहने और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि लोकगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को शिक्षित और जागरूक करने का सशक्त माध्यम भी हैं।

अनूप नयाल की खास बात यह है कि उन्होंने अपने कार्यस्थल को भी संस्कृति से जोड़ दिया है। उन्होंने थाने में ही ढोल-दमाऊ, हुड़का जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र विरासत के रूप में संजोकर रखे हैं। ये वाद्य यंत्र केवल संगीत के साधन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की पहचान और गौरव का प्रतीक हैं। जब भी उन्हें अवसर मिलता है, वे इन वाद्य यंत्रों के साथ लोकगीत गाकर लोगों को सामाजिक संदेश देते हैं।उनके गीतों में पहाड़ की मिट्टी की खुशबू और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव साफ झलकता है। विशेष रूप से वे युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति सचेत करने का प्रयास करते हैं। लोकभाषा और लोकधुनों में दिया गया संदेश लोगों के दिल तक सीधे पहुंचता है और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।

पुलिस की जिम्मेदारियों के साथ संस्कृति संरक्षण का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है। अनूप नयाल यह साबित कर रहे हैं कि यदि इच्छा और लगन हो तो अपनी ड्यूटी के साथ-साथ समाज और संस्कृति के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है। उनका यह प्रयास न केवल युवाओं के लिए प्रेरणा है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि लोकसंस्कृति के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सकती है।आज जब आधुनिकता के दौर में पारंपरिक कला और संस्कृति कहीं पीछे छूटती नजर आती है, ऐसे में अनूप नयाल जैसे लोग अपनी पहल से यह संदेश दे रहे हैं कि अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी समाज को नई दिशा दी जा सकती है। उनके लोकगीतों की गूंज केवल संगीत नहीं, बल्कि जागरूकता, जिम्मेदारी और संस्कृति के संरक्षण का संदेश है।

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