UKD ने आशुतोष नेगी को केंद्रीय उपाध्यक्ष के पद से हटाया, रिटा. कैप्टन राकेश ध्यानी पार्टी से निष्कासित
1 min readराज्य की एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल ने दो बड़े फैसले लिए हैं, इससे राज्य की राजनीति में चर्चाएं गर्म हैं![]()
देहरादून: क्षेत्रीय पार्टी उत्तराखंड क्रांति दल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए केंद्रीय उपाध्यक्ष रहे आशुतोष नेगी को पद मुक्त कर दिया है. आशुतोष नेगी ने करीब 2 वर्ष पूर्व यूकेडी ज्वाइन की थी. इस दौरान उन्होंने दल के भीतर नई चेतना और ऊर्जा जगाने का काम भी किया, और लगातार जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया.
यूकेडी ने आशुतोष नेगी को केंद्रीय उपाध्यक्ष के पद से हटाया: दल के केंद्रीय महामंत्री और केंद्रीय कार्यालय प्रभारी देव चंद उत्तराखंडी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि केंद्रीय अध्यक्ष के निर्देश पर पार्टी शीर्ष नेतृत्व की ओर से लिए गए निर्णय के अनुसार आशुतोष नेगी को उत्तराखंड क्रांति दल में वर्तमान केंद्रीय उपाध्यक्ष के पद और अन्य दायित्वों से तत्काल प्रभाव से पद मुक्त किया जाता है.
आशुतोष नेगी को पद से हटाने वाले लेटर में ये लिखा: यूकेडी का कहना है कि आशुतोष नेगी के अब तक पार्टी के प्रति दिए गए योगदान के लिए दल उनका आभारी रहेगा. भविष्य में उनके पार्टी के लिए किए गए कार्यों को ध्यान में रखते हुए नई जिम्मेदारी के लिए विचार किया जा सकता है.
रिटा कैप्टन राकेश ध्यानी यूकेडी से 6 साल के लिए निष्कासित: इसके साथ ही उत्तराखंड क्रांति दल ने सेवानिवृत्त कैप्टन राकेश ध्यानी को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है. दल ने इसकी वजह यह बताई है कि 19 जून को पदमुक्त किए जाने के बाद उनका व्यवहार दल के प्रति उचित और अनुकूल नहीं रहा. इसलिए उनके विरुद्ध प्राप्त तथ्यों और संगठन के हितों के दृष्टिगत पार्टी शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें तत्काल प्रभाव से उत्तराखंड क्रांति दल की प्राथमिक सदस्यता और दल से 6 वर्षों के लिए निष्कासित किए जाने का निर्णय लिया है. इस आदेश के प्रभावी होने के बाद वह दल के किसी भी पद, दायित्व या फिर संगठनात्मक गतिविधि में भाग लेने के लिए अधिकृत नहीं होंगे.
यूकेडी उत्तराखंड की एकमात्र क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी: यूकेडी यानी उत्तराखंड क्रांति दल की स्थापना 25 जुलाई 1979 को हुई थी. ये राज्य की एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी है. यूकेडी ने राज्य आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया था. इस पार्टी का उद्देश्य उत्तराखंड का सर्वांगीण विकास, राज्य के निवासियों के अधिकारों और स्थानीय संस्कृति को बचाए रखना था. हालांकि राज्य बनने के बाद यूकेडी छिटपुट सीटें जीतने के बाद बैकग्राउंड में चली गई. इसके लिए इसके नेताओं की अति महात्वाकांक्षा को जिम्मेदार बताया जाता है.
