बर्थ सर्टिफिकेट के बदले नियम, देरी पर कोर्ट के लगाने पड़ेंगे चक्कर, जानें कैसे होगा नाम में बदलाव
1 min read
उत्तराखंड में बर्थ सर्टिफिकेट बनाने वाले की संख्या बढ़ी है. ऐसे में संसद में जन्म पंजीकरण से संबंधित बिल पेश किया गया. रिपोर्ट- रोहित सोनी
देहरादून: बच्चों के जन्म के बाद बर्थ सर्टिफिकेट (जन्म प्रमाणपत्र) एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है. जिसके जरिए तमाम डॉक्यूमेंट बनाने या फिर स्कूल में दाखिला दिलाने के दौरान इसकी जरूरत होती है. लेकिन वर्तमान में प्रदेश के अस्पतालों में बर्थ सर्टिफिकेट बनाने में काफी देरी देखी जा रही है. जबकि नियमानुसार, बच्चा पैदा होने के 7 दिन के भीतर बर्थ सर्टिफिकेट बनाना अनिवार्य है. हालांकि, समय के साथ ही इसमें तमाम बदलाव भी हुए. ऐसे में भारत सरकार के स्तर से भी बड़े बदलाव होने जा रहे हैं. लेकिन उससे पहले ही उत्तराखंड में बर्थ सर्टिफिकेट बनाने वाले की संख्या में काफी अधिक इजाफा देखा जा रहा है.
जन्म प्रमाण पत्र किसी भी बच्चे के जन्म का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है. जिसके आधार पर ही आधार कार्ड से लेकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार किए जाते हैं, और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर स्कूल में दाखिला मिलता है. साल 2023 में भारत सरकार ने जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण एक्ट में संशोधन किया था. जिसके बाद जन्मतिथि का एकमात्र डॉक्यूमेंट जन्म प्रमाण पत्र बन गया है. जिसके बाद से जन्म प्रमाणपत्र का महत्व और अधिक बढ़ गया है. यही नहीं, साल 2023 में संशोधन के साथ ही जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था को ऑनलाइन के साथ ही नेशनल स्तर पर भी कर दिया है. ऐसे में भारत सरकार की ऑफिशल वेबसाइट सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए जन्म और मृत्यु का प्रमाण पत्र जारी किया जा रहा है.
21 दिन के भीतर प्रमाण पत्र बनाना आसान: वहीं, भारत सरकार ने एक बार फिर इस एक्ट में बड़ा संशोधन किया है. हालांकि, ये व्यवस्था अभी लागू नहीं हुई है, लेकिन जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में 31 जुलाई 2026 को पारित हो गया है. जिसमें भारत सरकार ने जन्म और मृत्यु पंजीकरण में देरी करने संबंधित महत्वपूर्ण प्रावधान किए हैं. वर्तमान समय में बच्चे के जन्म के बाद 21 दिन के भीतर अगर बर्थ सर्टिफिकेट बनवा रहे हैं तो बेहद ही सरल प्रक्रिया से जन्म प्रमाण पत्र बन जाएगा.
एक्ट में संशोधन के बाद जटिल होगी प्रक्रिया: लेकिन भारत सरकार के संशोधन के बाद अब जन्म प्रमाण पत्र बनाना और भी जटिल हो जाएगा. फिर एक से 2 साल की देरी की जाती है तो फिर जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिला मजिस्ट्रेट/ एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही अगर 2 साल से अधिक की देरी होती है तो जन्म प्रमाण पत्र, प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही बन पाएगा.
अब जन्म प्रमाण पत्र होगा जरूरी: सरकार जन्म और मृत्यु के पंजीयन की व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है और ये विधेयक उसी के तहत लाया गया है. सरकार जन्म और मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल और व्यवस्थित बनाने के साथ फर्जी दस्तावेजों पर लगाम लगाने की तैयारी में है. नया कानून लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र को दूसरे अहम सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं के लिए प्रमुख दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकेगा. नए कानून के लागू होने के बाद जन्म प्रमाण पत्र भारतवासी के जीवन का सबसे जरूरी दस्तावेज बन जाएगा. इस विधेयक के कानून बन जाने के बाद एक साल के भीतर जन्म और मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी हो जाएगा.
| पिछले 3 सालों के भीतर उत्तराखंड में रजिस्टर्ड किए गए बर्थ: उत्तराखंड में साल 2023 में 2,27,990 बर्थ, साल 2024 में 2,77,697 बर्थ और साल 2025 में 2,81,344 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. अल्मोड़ा जिले में साल 2023 में 7,209 बर्थ, साल 2024 में 13,770 बर्थ और साल 2025 में 10,856 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. बागेश्वर जिले में साल 2023 में 4,870 बर्थ, साल 2024 में 8,225 बर्थ और साल 2025 में 6,835 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. चमोली जिले में साल 2023 में 4,064 बर्थ, साल 2024 में 4,704 बर्थ और साल 2025 में 4,071 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. चंपावत जिले में साल 2023 में 3,098 बर्थ, साल 2024 में 4,278 बर्थ और साल 2025 में 4,130 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. देहरादून जिले में साल 2023 में 51,153 बर्थ, साल 2024 में 49,109 बर्थ और साल 2025 में 51,814 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. पौड़ी गढ़वाल जिले में साल 2023 में 14,938 बर्थ, साल 2024 में 20,953 बर्थ और साल 2025 में 19,696 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. हरिद्वार जिले में साल 2023 में 47,090 बर्थ, साल 2024 में 49,365 बर्थ और साल 2025 में 58,009 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. नैनीताल जिले में साल 2023 में 16,112 बर्थ, साल 2024 में 25,633 बर्थ और साल 2025 में 24,927 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. पिथौरागढ़ जिले में साल 2023 में 8,807 बर्थ, साल 2024 में 12,379 बर्थ और साल 2025 में 10,407 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. रुद्रप्रयाग जिले में साल 2023 में 5,234 बर्थ, साल 2024 में 6,547 बर्थ और साल 2025 में 6,129 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. टिहरी जिले में साल 2023 में 7,943 बर्थ, साल 2024 में 16,892 बर्थ और साल 2025 में 15,439 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. उधम सिंह नगर जिले में साल 2023 में 49,800 बर्थ, साल 2024 में 51,273 बर्थ और साल 2025 में 56,086 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. उत्तरकाशी जिले में साल 2023 में 7,672 बर्थ, साल 2024 में 14,569 बर्थ और साल 2025 में 12,948 बर्थ रजिस्टर्ड हुए हैं. |
समय पर प्रमाण पत्र जारी नहीं होने का कारण: उत्तराखंड की बात करें तो उत्तराखंड में भी भारत सरकार की ओर से साल 2023 में किए गए संशोधन के बाद नई व्यवस्था लागू हो गई थी. जिसके तहत प्रदेश में भारत सरकार की सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए ही जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं. लेकिन प्रदेश के खासकर सरकारी अस्पतालों में कई बार जन्म प्रमाण पत्र समय पर न जारी होने के मामले सामने आ चुके हैं. जिस कारण अभिभावकों को अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. हालांकि, इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कई बार तकनीकी खामियों या फिर अत्यधिक कामों की व्यवस्था के चलते सर्टिफिकेट जारी करने में देरी हो जाती है, लेकिन विभाग की कोशिश यही है, इस समय पर सर्टिफिकेट जारी किए जाए.
2023 के बाद आया उछाल: साल 2023 में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र की प्रक्रिया ऑनलाइन और नेशनलाइज्ड होने के बाद उत्तराखंड में जन्म प्रमाण पत्र बनाने वाले लोगों की संख्या में काफी अधिक उछाल देखा गया है. ऐसा हम नहीं कह रहे हैं बल्कि उत्तराखंड में सालाना बच्चों के जन्म के मुकाबले बड़ी संख्या में जन्म प्रमाण पत्र जारी हो रहे हैं.
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2023- 24 के दौरान प्रदेश में 1 लाख 51 हजार 7 बच्चों का जन्म हुआ था. जिसके सापेक्ष साल 2023 में 2 लाख 27 हजार 990 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं. इसी तरह, वित्तीय वर्ष 2024- 25 में 1 लाख 47 हजार 717 बच्चों का जन्म हुआ था. जिसके सापेक्ष साल 2024 में 2 लाख 77 हजार 697 जन्म प्रमाण पत्र जारी हुए. इसके साथ ही वित्तीय वर्ष 2025- 26 के दौरान प्रदेश में 1 लाख 53 हजार 299 बच्चों का जन्म हुआ था. जिसके सापेक्ष साल 2025 में 2,81,344 जन्म प्रमाण पत्र जारी हुए.
उत्तराखंड में पिछले कुछ सालों में पैदा हुए बच्चों की संख्या:
|
जन्म प्रमाण पत्र और मृत्यु प्रमाण पत्र काफी महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं. हालांकि, भारत सरकार की ओर से साल 2023 में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) एक्ट आया था. ऐसे में 1 अक्टूबर 2023 से कोई भी बच्चा पैदा हो रहा है, उसके लिए उम्र का एकमात्र प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र रहा है. जबकि पहले हाईस्कूल सर्टिफिकेट के साथ ही अन्य डॉक्यूमेंट को जन्म प्रमाण पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. लिहाजा, जन्म प्रमाण पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो आपकी उम्र की पुष्टि करेगा.
-इवा आशीष श्रीवास्तव, निदेशक, नागरिक पंजीकरण-
देरी होने पर करनी पड़ेगी कड़ी मशक्कत: ऐसे में जन्म प्रमाण पत्र बच्चों के पैदा होने के साथ ही अगर बनवा लिया जाता है तो काफी बेहतर है, नहीं तो समय बीतने के बाद जन्म प्रमाण पत्र बनाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. इसी बीच भारत सरकार एक बार फिर जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण एक्ट में संशोधन करने जा रही है. क्योंकि बाद में जन्म प्रमाण पत्र बनाए जाने को लेकर तमाम गंभीर मामले देखने को मिल रहे हैं. ऐसे में रजिस्ट्रेशन को और अधिक बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि समय से जो सर्टिफिकेट बनवा रहे हैं, उनका आसानी से बन जाए. लेकिन अगर सर्टिफिकेट बनवाने में देरी हो रही है तो उसमें कड़े प्रावधान किया जा रहे हैं, क्योंकि देरी से बनने वाले सर्टिफिकेट में ही लापरवाही बरती जा रही है.
इनकी होगी जिम्मेदारी: किसी पंचायत में जन्म हुआ है तो उसके पंचायत अधिकारी रजिस्ट्रार होंगे. सरकारी अस्पताल में बच्चों का जन्म हुआ है तो वहां के एमओआईसी (मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज) रजिस्ट्रार होंगे. नगर निकाय क्षेत्र में हुई है तो नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी या ईओ रजिस्ट्रार होंगे. हालांकि, सरकारी अस्पतालों में बर्थ सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया अलग है. जिसके तहत अगर सरकारी अस्पताल में किसी बच्चे का जन्म होता है तो वहां के एमओआईसी की जिम्मेदारी है कि जच्चा बच्चा के डिस्चार्ज से पहले ही परिवार को जन्म प्रमाण पत्र दे दिया जाए.
बिना नाम का भी जारी होगा जन्म प्रमाण पत्र: सरकारी अस्पतालों में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में देरी होने की मुख्य वजह यही है कि कई बार लोग अपने बच्चों का नाम 7 दिन में सोच नहीं पाते हैं, जिसके चलते समय से उनका जन्म प्रमाण पत्र नहीं बन पाता है. बल्कि इसमें एक व्यवस्था यह भी है कि बिना नाम के भी बर्थ सर्टिफिकेट जारी किया जा सकता है. और जब परिवार नाम सोच लेता है, उसके बाद नाम को अपडेट कर जा सकता है. अगर किसी प्राइवेट अस्पताल में किसी बच्चे का जन्म हो रहा है तो प्राइवेट अस्पताल की जिम्मेदारी है कि बच्चे और उनके माता-पिता की जानकारी को संबंधित नगर निकाय या पंचायत को भेजना अनिवार्य है. लेकिन कई बार जनता को जानकारी का अभाव होने के कारण और अस्पतालों में अन्य कामों की अधिकता होने के कारण जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में देरी हो जाती है.
वर्तमान में किसी भी बच्चे की जन्म के बाद 21 दिन के भीतर सर्टिफिकेट बनवाना बेहद आसान है और निशुल्क भी. लेकिन बच्चों के जन्म के 21 दिन से 30 के भीतर सर्टिफिकेट बनवाने में 20 रुपए का अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा. लेकिन अगर 30 दिन के बाद और एक साल के भीतर बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट बनवाना है तो फिर तहसीलदार या ईओ अप्रूवल के बाद ही बर्थ सर्टिफिकेट बन पाएगा, साथ ही 50 रुपए का लेट शुल्क भी लगेगा. लेकिन अगर बच्चे के जन्म के 1 साल के बाद अगर सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आवेदन किया जाता है तब वह प्रक्रिया काफी अधिक जटिल हो जाएगी क्योंकि जन्म प्रमाण पत्र तभी बनेगा जब एसडीएम की ओर से अप्रूवल मिलेगा और 100 रुपए का लेट शुल्क भी लगेगा.
-इवा आशीष श्रीवास्तव, निदेशक, नागरिक पंजीकरण-
जन्म प्रमाण पत्र में नाम बदलने के नियम: इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि, जन्म प्रमाण पत्र बनाने को लेकर वर्तमान समय में चल रहे नियम के अनुसार, अगर बच्चे के माता-पिता बच्चे का नाम 21 दिन के भीतर नहीं तय कर पाए हैं तो फिर वो बिना नाम के ही सर्टिफिकेट ले सकते हैं. ऐसे में उन्हें 1 साल से 15 साल के बीच बर्थ सर्टिफिकेट में बच्चों के नाम को अपडेट करवाना जरूरी होगा. अगर माता-पिता एक साल के भीतर बर्थ सर्टिफिकेट में बच्चों के नाम को अपडेट करवा देते हैं तो फिर पेरेंट्स के एप्लीकेशन के आधार पर ही बच्चों के नाम को जन्म प्रमाण पत्र में अपडेट कर दिया जाएगा. लेकिन एक साल के बाद और 15 साल के बीच अगर बच्चों के नाम को जन्म प्रमाण पत्र में अपडेट करवाते हैं तो फिर उन्हें एप्लीकेशन के साथ ही एफिडेविट और कोई प्रूफ भी देना होगा, जिसमें बच्चे का नाम चलता आ रहा है. लेकिन 15 साल के बाद बर्थ सर्टिफिकेट में बच्चे का नाम अपडेट कराने की कोई व्यवस्था नहीं है.
जन्म प्रमाण पत्र में एक बार नाम चढ़ जाने के बाद अगर नाम बदलवाना है तो फिर उसके लिए अलग प्रक्रिया के दौर से गुजरना होगा. किसी बच्चे के जन्म के 1 साल के भीतर अगर बच्चों के नाम को जन्म प्रमाण पत्र में बदल जाता है तो वह माता-पिता के एप्लीकेशन और एफिडेविट के आधार पर बदल सकते हैं. लेकिन 1 साल के बाद जन्म प्रमाण पत्र पर बच्चों का नाम बदलने के लिए माता-पिता को एप्लीकेशन के साथ ही एफिडेविट देना होगा लेकिन जन्म प्रमाण पत्र में चढ़े नाम के साथ ही उर्फ लगाकर नया नाम अंकित किया जाएगा.
उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग की निदेशक डॉ. शिखा जगपांगी ने कहा कि,
आज के इस दौर में बर्थ सर्टिफिकेट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है. जिसका इस्तेमाल, आधार कार्ड बनवाने से लेकर तमाम जगहों पर हो रहा है. जिसको देखते हुए साल 2023 से डिजिटल माध्यम से पूरे देश भर में जारी किया जा रहा है. ऐसे में जैसे ही अस्पतालों में बच्चों का जन्म होता है तो परिवार को कुछ दिन के भीतर ही जन्म प्रमाण पत्र अस्पतालों से ही जारी कर दिया जाता है. इसके लिए बच्चों के माता-पिता की ओर से जानकारी भरकर एप्लीकेशन दिया जाता है उसके आधार पर जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जाता है. हालांकि, स्वास्थ्य विभाग की पूरी कोशिश है कि बच्चों के जन्म होने के बाद समय पर जन्म प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाए, लेकिन कुछ तकनीकी दिक्कतों के चलते थोड़ी देरी होती है. लेकिन लोगों को जन्म प्रमाण पत्र के प्रति जागरूक किया जा रहा है.
-डॉ. शिखा जगपांगी, निदेशक, स्वास्थ्य विभाग-
