जैव विविधता आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर पब्लिक-प्राइवेट संवाद में मंथन।
1 min read
मसूरी। सैफरन लीफ होटल में 13 अगस्त को UNEP, सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल बिजनेस (CRB) एवं पीपल्स साइंस इंस्टीट्यूट (PSI) के संयुक्त तत्वावधान में TEEB फ्रेमवर्क के अंतर्गत पब्लिक-प्राइवेट संवाद कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में 15 से अधिक व्यवसायों एवं एफपीओ के प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी तथा निजी क्षेत्र के खरीदारों ने प्रतिभाग किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एस.एस. नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में जलवायु अनुकूलन के लिए क्लस्टर एप्रोच अपनाकर विकास कार्यों को संचालित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी को केंद्र में रखकर योजनाओं का निरूपण करना सरकार की प्रतिबद्धता है।
उत्तराखंड ऑर्गेनिक कमोडिटी बोर्ड के प्रबंध निदेशक नवीन बर्फाल ने कहा कि आजीविका संवर्धन के लिए प्रभावी सपोर्ट सिस्टम स्थापित किया जाना जरूरी है, जिससे स्थानीय व्यवसायों को अपनी चुनौतियों से निपटने में मदद मिल सके। उन्होंने आर्थिक पहलू को ध्यान में रखते हुए जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ जैविक पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
UNEP के प्रतिनिधि रूबिन ने उत्तराखंड के लिए सकारात्मक वैल्यू चेन डेवलपमेंट स्ट्रेटजी तैयार करने के लिए विभिन्न स्टेकहोल्डर्स के साथ निरंतर संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि G20 बायोइकोनॉमी सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए कई देश जैव विविधता आधारित अर्थव्यवस्था को अपना रहे हैं।
कार्यशाला में शिखर फूड्स, हिम विकास एसआरसी एवं पहाड़ी उत्पाद सहित विभिन्न व्यवसायों ने अपने कार्यों एवं अनुभवों का प्रस्तुतीकरण किया। इससे पूर्व पीपल्स साइंस इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. देवाशीष सेन ने कार्यशाला के उद्देश्यों की जानकारी साझा करते हुए प्रतिभागियों का स्वागत किया।
इस दौरान उत्तराखंड वन निगम, रीप परियोजना, कृषि विभाग सहित अन्य सरकारी विभागों के प्रतिनिधियों ने अपनी कार्ययोजनाओं एवं रणनीतियों को साझा किया। सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल बिजनेस के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. रिजीत सेन गुप्ता, संजीव साहू, दवनीत कौर एवं नित्या ने कार्यशाला में सक्रिय भागीदारी की।

UNEP की ओर से रिया तथा भारतीय वन सेवा की सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी अलका ने जैव विविधता एवं अर्थव्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं पीपल्स साइंस इंस्टीट्यूट की ओर से कुलदीप उनियाल एवं प्रियांशु गुप्ता ने भी कार्यशाला में सक्रिय भूमिका निभाई। कार्यशाला में जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय आजीविका, जैविक उत्पादन, बाजार से जुड़ाव और सतत आर्थिक विकास के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तार से चर्चा की गई।
