September 12, 2026

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बीमार पत्नी को कंधे पर उठाकर 7 किमी पैदल चलकर पहुंचाया अस्पताल, सीएम धामी से लगाई ये गुहार

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पौड़ी गढ़वाल के पल्ला कमलिया गांव में बीमार पत्नी को पति मीलों पैदल चलकर हॉस्पिटल ले गया.

पौड़ी: उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में आज भी कई गांव ऐसे हैं, जो आज भी सड़क सुविधा से महरूम हैं. रोड के अभाव में ग्रामीणों को आए दिन परेशानियों का सामना करना पड़ा है. स्थित तब विकराल रूप ले लेती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ जाता है. ग्रामीण बीमार व्यक्ति को डोली या डंडी-कंडी के सहारे मीलों का सफर तय कर रोड तक पहुंचाते हैं. कई बार तो मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं. जहां एक ओर सरकार विकास का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर विकास की ये स्याह हकीकत दावों की पोल खोल रही हैं.

कुछ ऐसा ही पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लॉक के दूरस्थ पल्ला कमलिया गांव में देखने को मिला, जो सरकारी व्यवस्था की जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं. गांव तक सड़क नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीणों को आज भी बीमार मरीजों को चारपाई और कंधों के सहारे करीब 7 किलोमीटर तक पैदल चलकर हॉस्पिटल पहुंचाना पड़ता है. बीते दिन एक ग्रामीण की पत्नी तेज बुखार से पीड़ित हो गई और उसे तत्काल हॉस्पिटल पहुंचाने की जरूरत महसूस हुई.

साहिल अपनी बीमार पत्नी काजल को कंधे पर उठाकर करीब 7 किलोमीटर पैदल अस्पताल पहुंचाने के लिए निकल पड़ा. इस बेबसी और लाचारी में उसने एक वीडियो बनाकर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से गांव तक सड़क पहुंचाने की गुहार लगाई है. साहिल का कहना है कि सड़क के अभाव में गांव में पहले भी कई लोगों की जान जा चुकी है. ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क निर्माण के लिए कई बार सर्वे किया जा चुका हैं और लंबे समय से सड़क की मांग भी उठाई जा रही है. लेकिन अब तक सड़क निर्माण नहीं हो सका है.

गांव के लिए करीब 3 किलोमीटर सड़क बननी है, जिसका सर्वे भी हो चुका है. लेकिन लंबे समय बाद भी सड़क बनने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है. इससे पहले भी कई लोगों को डंडी कंडी के सहारे अस्पताल पहुंचाया गया है.
-नरेंद्र कुमार,ग्राम प्रधान-

इसका सबसे ज्यादा खामियाजा बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को भुगतना पड़ता है. साहिल के 55 वर्षीय पिता बलवीर सिंह की तबीयत खराब होने पर कुछ समय पहले उन्हें भी ग्रामीणों की मदद से कंधों के सहारे सड़क तक पहुंचाया गया था. गांव के लोगों के लिए जोगिमणि के पास स्थित अस्पताल ही प्राथमिक उपचार का प्रमुख सहारा है. हालांकि वहां भी सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं हैं, लेकिन सड़क के अभाव में ग्रामीणों के पास फिलहाल यही सबसे नजदीकी विकल्प है.

क्षेत्र के विधायक सतपाल महाराज लोक निर्माण विभाग के मंत्री भी हैं, बावजूद इसके लोग सड़क के लिए तरस रहे हैं, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. पल्ला कमलिया की यह तस्वीर सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पहाड़ों में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं के बीच के गहरे संकट को सामने लाती है.
-बलवंत गुसांई,उक्रांद नेता-

साहिल शहर में नौकरी करता है और समय-समय पर अपने गांव आते-जाते रहता है. साहिल ने वीडियो के माध्यम से गांव की बदहाल स्थिति और अपनी आपबीती साझा की. साहिल का कहना है कि सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण गांव में पहले भी कई लोग समय पर इलाज न मिलने से अपनी जान गंवा चुके हैं. कहा कि जब रात के समय कोई ग्रामीण अचानक बीमार पड़ता है तो उसे अस्पताल ले जाना सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है. सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मरीज को कंधों पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल ले जाना पड़ता है. कई बार रात में मजबूरी में सुबह होने का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन तब तक हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि काफी देर हो चुकी होती है.

रोड के सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है. सड़कों की जल्द ही डीपीआर तैयार की जाएगी. इसके बाद आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी.
-पान सिंह बिष्ट, अधिशासी अभियंता, पीएमजीएसवाई

ग्रामीणों का कहना है कि जब सड़क निर्माण के लिए बार-बार सर्वे हो चुके हैं, तो आखिर सड़क कब बनेगी? क्या किसी गंभीर मरीज की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा.

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