October 18, 2026

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मसूरी के गरीब परिवार पर टूटा मुसीबतों का पहाड़, दो साल से बिस्तर पर पत्नी, अब पति के दिल में भी छेद

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बीमार पत्नी के बाद खुद के दिल में दो छेद, इलाज के लिए मदद की आस, ओंकार ने लगाई मदद की गुहार, रिपोर्ट- सुनील सोनकर

मसूरी: पहाड़ों की रानी मसूरी में एक गरीब परिवार इन दिनों जिंदगी की सबसे कठिन परिस्थितियों से जूझ रहा है. परिवार के मुखिया ओंकार की पत्नी पिछले करीब दो साल से पैरालिसिस के कारण बिस्तर पर है. परिवार किसी तरह अपना गुजर-बसर कर ही रहा था कि अब ओंकार के सामने भी गंभीर बीमारी से जूझने की चुनौती खड़ी हो गई है.

दरअसल, हाल ही में बुखार होने पर मेडिकल जांच कराई गई तो उसके दिल में दो छेद होने की बात सामने आई. जिससे गरीब ओंकार के सामने मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा. अब डॉक्टरों ने उसे जल्द उपचार कराने की सलाह दी है, लेकिन ओंकार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है.

परिवार में कमाई का एकमात्र सहारा उसका इकलौता बेटा है, जो मजदूरी कर अपने माता-पिता का भरण-पोषण कर रहा है. रोजाना की मजदूरी से घर का खर्च चलाना ही मुश्किल है. ऐसे में ओंकार के इलाज का खर्च जुटाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

दो साल से बिस्तर पर पत्नी, अब पति के इलाज की चिंता: ओंकार की पत्नी करीब दो साल से पैरालिसिस यानी लकवाग्रस्त होने के कारण बिस्तर पर है, वो चलने-फिरने में असमर्थ है. पति की बीमारी के बाद उसकी चिंता और बढ़ गई है. वो भावुक होकर अपने पति के इलाज के लिए मदद की गुहार लगा रही है.

उसकी आंखों में पति को बचाने की इच्छा साफ दिखाई देती है, लेकिन आर्थिक मजबूरी उसके सामने बड़ी बाधा बनी हुई है. परिजनों का कहना है कि इलाज कराने की इच्छा और हिम्मत पूरी है, लेकिन उनके पास उपचार का खर्च उठाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं. समय पर इलाज नहीं मिलने को लेकर परिवार चिंतित है. पैरालाइज्ड महिला रजनी देवी ने रूंधे गले में कहा कि,

आधार नहीं बना, आयुष्मान का लाभ भी नहीं मिल पा रहा: परिवार की परेशानी इस कारण भी बढ़ गई है कि ओंकार का आधार कार्ड अब तक नहीं बन पाया है. परिजनों के अनुसार, कई बार आवेदन करने के बावजूद आधार कार्ड नहीं बन सका. आधार कार्ड के अभाव में उसे प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) का लाभ लेने में भी परेशानी आ रही है.

परिवार चाहता है कि प्रशासन आधार कार्ड बनवाने में सहयोग करें. ताकि, यदि वो योजना के लिए पात्र है, तो उसे सरकारी स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सके और उपचार का रास्ता आसान हो. क्योंकि, इलाज के लिए उन्हें पैसे की जुगत करना मुश्किल हो गया है.

पड़ोसी बोले- सरकार और सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए: ओंकार के पड़ोसी दिनेश ने बताया कि ओंकार बेहद गरीब है और इस समय काफी परेशानी में है. उसकी पत्नी पहले से ही बीमारी के कारण बिस्तर पर है और अब ओंकार खुद गंभीर बीमारी से जूझ रहा है. ऐसे में परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है. दिनेश ने लोगों से मदद की अपील करते हुए कहा कि,

मदद की आस में परिवार: ओंकार का परिवार अब सरकार, प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वो निजी स्तर पर महंगा उपचार करा सके. ऐसे में सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ जरूरतमंद परिवार को आर्थिक एवं चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने की जरूरत है. ओंकार ने अपनी पीड़ी रखते हुए कहा कि,

आधार कार्ड न होने से नहीं बन रहा आयुष्मान कार्ड: ओंकार ने कहा कि मसूरी में 18 साल से ऊपर वालों के आधार कार्ड नहीं बन रहे हैं. इसके लिए मुझे देहरादून जाना होगा, लेकिन मेरे पास समय और पैसा नहीं है. आधार कार्ड न होने की वजह से आयुष्मान कार्ड नहीं बन रहा है. हमारा एक बेटा है. वो भी मामूली तनख्वाह पर काम करता है. मेरी सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से अपील है कि मेरी मदद करें.

बिस्तर पर पड़ी महिला को ठीक होने की आस: बिस्तर पर पड़ी पत्नी अपने पति के ठीक होने की आस लगाए हैं, तो वहीं इकलौता बेटा मजदूरी कर माता-पिता की जिम्मेदारी उठाने की कोशिश कर रहा है. परिवार की अपील है कि समय रहते मदद का हाथ बढ़ाया जाए. ताकि, बीमारी से जूझ रहे ओंकार को उपचार मिल सके और परिवार को बिखरने से बचाया जा सके.

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