August 29, 2026

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बेंगलुरु में ड्रीम ए ड्रीम फाउंडेशन का वार्षिक शैक्षिक सुधार सम्मेलन संपन्न

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देहरादून। देश की शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार और समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पिछले एक दशक से सक्रिय ड्रीम ए ड्रीम फाउंडेशन का आठवां वार्षिक शैक्षिक सुधार सम्मेलन कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में संपन्न हुआ। वर्ष 2026 के सम्मेलन की थीम ‘CTS (चेंज द स्क्रिप्ट)’ रही। कार्यक्रम का शुभारंभ फाउंडेशन की CEO सुचेता भट्ट ने प्रतिभागियों के स्वागत और अभिनंदन के साथ किया।

सम्मेलन में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व डायट देहरादून की वरिष्ठ प्रवक्ता टीना मोहन, डायट रुड़की के वरिष्ठ प्रवक्ता राजीव आर्य तथा राजकीय इंटर कॉलेज सड़ब, जौनपुर, टिहरी गढ़वाल के प्रधानाचार्य नेत्रमणि बडोनी ने शिक्षा प्रतिनिधि के रूप में किया। सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविदों, समाजसेवियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, स्तंभकारों तथा शिक्षा एवं अनुसंधान से जुड़े अधिकारियों ने प्रतिभाग किया।

सम्मेलन में वर्षभर की शैक्षिक उपलब्धियों, भविष्य की कार्ययोजनाओं और लक्ष्यों पर व्यापक मंथन किया गया। साथ ही वैश्विक शिक्षा मानदंडों का अध्ययन करते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और अधिक समावेशी बनाने पर विचार-विमर्श हुआ।

उत्तराखंड के शिक्षा प्रतिनिधियों ने प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और शिक्षा तंत्र की आवश्यकताओं एवं चुनौतियों को सम्मेलन में प्रमुखता से रखा। उन्होंने राजकीय विद्यालयों में मानवीय एवं भौतिक संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने, शिक्षा के आधुनिकीकरण और धरातलीय स्तर पर व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रतिनिधियों के अनुसार फाउंडेशन ने उत्तराखंड में अपनी शैक्षिक गतिविधियों को और व्यापक बनाने तथा भविष्य में सक्रिय सहयोग का आश्वासन दिया है।

ड्रीम ए ड्रीम फाउंडेशन उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग के साथ मिलकर वंचित, शोषित, पिछड़े और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रहा है। फाउंडेशन का उद्देश्य शिक्षा को सर्वसुलभ, गुणवत्तापूर्ण, आनंदमय और मौलिक बनाना है।

समापन अवसर पर फाउंडेशन के फाउंडर विशाल जी और CEO सुचेता भट्ट ने सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्र की शिक्षा व्यवस्था के उन्नयन तथा वंचित एवं विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के शैक्षिक समावेशन के लिए निरंतर योगदान का आह्वान किया।

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