केदारनाथ हेली सेवा पर संकट के बादल, आज से उड़ानें बंद करने का ऐलान
देहरादून
। केदारनाथ हेली सेवा संचालन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। 30 अक्टूबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे के बाद सुरक्षा संबंधी नए आदेशों के बीच हेली सेवा ऑपरेटरों ने दो नवंबर से अपने हेलीकॉप्टर जमीन पर रखने का ऐलान किया है। मसूरी राजस एयरोस्पोर्ट्स एंड एडवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ मनीष सैनी ने कहा कि नए आदेश के तहत हेली सेवा का संचालन आर्थिक रूप से संभव नहीं रह गया है। ऐसे में ऑपरेटरों के पास उड़ानें बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन यात्रियों ने पहले से बुकिंग कराई है, उन्हें पूरी धनराशि वापस की जाएगी और उनकी हरसंभव मदद की जाएगी। मनीष सैनी ने 30 अक्टूबर को हुए हेलीकॉप्टर हादसे पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि एक साथी ऑपरेटर का हेलीकॉप्टर क्रू और यात्रियों सहित उन्हीं पहाड़ों में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जहां हेली सेवा से जुड़े सभी लोग रोजाना उड़ान भरते हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस क्षेत्र का हर व्यक्ति उनके दुख में शामिल है। उन्होंने कहा कि ऑपरेटर डीजीसीए, सरकार या सुरक्षा के उद्देश्य से जारी आदेश के खिलाफ नहीं हैं। प्रत्येक तीर्थयात्री की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और ऑपरेटर भी सुरक्षित हवाई सेवा के पक्षधर हैं। इस संबंध में अधिकारियों के सामने अपनी बात पूरी मर्यादा और सम्मान के साथ रखी गई है। सैनी के अनुसार, उनके हेलीकॉप्टर एक पायलट के संचालन के लिए डिजाइन और प्रमाणित हैं। इन्हें इसी व्यवस्था के तहत खरीदा गया है और इसी आधार पर बैंक ऋण एवं निवेश किया गया है। नए आदेश के तहत प्रत्येक उड़ान में छह में से दो सीटें खाली रखनी होंगी और अतिरिक्त क्रू का खर्च भी वहन करना पड़ेगा। ऐसे में उड़ान का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि यह आदेश की अवहेलना नहीं, बल्कि आर्थिक गणित से जुड़ी व्यावहारिक समस्या है।
उन्होंने कहा कि हेली सेवा उद्योग को कुछ छोटे ऑपरेटरों ने अपनी पूंजी, पारिवारिक बचत और बैंक ऋण दांव पर लगाकर खड़ा किया है। वर्षों की मेहनत और निवेश के बावजूद नए आदेश के तहत उड़ान संचालन की लागत निकालना संभव नहीं है। इससे न केवल ऑपरेटरों को भारी आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि बैंकों और निवेशकों का भरोसा भी प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यह उद्योग आर्थिक और मानसिक दोनों तरह के संकट से गुजर रहा है। मनीष सैनी ने डीजीसीए और सरकार से अपील की है कि हवाई सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे कदमों के साथ हेली सेवा उद्योग को बचाने के लिए भी व्यावहारिक रास्ता निकाला जाए। उन्होंने कहा कि ऑपरेटर सुरक्षित हवाई सेवा सुनिश्चित करने के लिए सरकार के साथ खड़े हैं। जिस दिन संचालन का रास्ता खुलेगा, वे फिर से आसमान में उड़ान भरने के लिए तैयार रहेंगे।

